Pages

Monday, 2 March 2015

LaPreK- Laghu Prem Katha!



After reading 'Ishq me shaher hona' of Ravish Kumar i was fantasized by it. It is of new genre called Laprek means micro fiction. He started this genre first on facebook and twitter and now it is published as book ,because of the initiative of Rajkamal Prakashan. So,I also inspired from him to write some micro fiction based on geography of Ahmedabad and my college VGEC. Some are from book (but I have made some changes in it.) and some are very fresh from my mind.

Here are some laprek.

1)  आज मे स्माल  टाउन सा फील कर रहा हू...
  और मे मेगा सीटी सी|
 हा, जब भी तुम सैटलाइ से गुजरती हो तब मे मनिनगर सा फील करता हू |
चुप करो| यहा सब अहमदाबाद सा फील करते हे|
ऐसा नही होता |
हा, तो मे सैटलाइट कैसे हो गयी ?
जैसे मे मनिनगर हो गया |
सही है,लेकिन तुम मुजसे प्यार करते हो या शहर से ?
शहर से,क्योंकि मेरा शहर तुम हो |
******
2)  तुम चली जाती हो बाद सब जगह अन्धेरा छा जता है|
क्यू?
पता नही बस एसा ही होता है, बिजली ही नही होती दिमाग मे..,
तुम तो  मोदी के गुजरात मे रहते हो ना |
नही,मे तुम्हारे दिल मे रहता हू|
******
3) वो c और f ब्लोक के बीच करिडोर मे बेठे थे|
बस एक अच्छे दोस्त की तरह ...
वो वहा से निकलते हुए प्रोफेसर और दोस्तो से नजर बचता बिठा था, बिना कुछ बोले|
जब जाने का वक़्त हुआ तब उसने कहा,तुम सर्फ दुनिया की चिंता करते हो|
कैसे ?
मेरा हाथ पकड के कुछ बात
तो करते| बुज्दील|
******
4) जब तुम मुझे मेरे घर से हिमालया मोल बुलाती हो,तब  ट्रैफिक मे फस जता हू और मेरा तेल निकल जता है| तुम कभी कबार डायरेक्ट पुह्चा करो |
वैसे भी तेल के दाम बड गये है |
बस बस बहुत हो गया, मे नही आया करुन्गि|फिर ये मत कहना कि मिस करता हु|
*******
6) सब को छुपाके वो गर्ल्स होस्टल से गुजरता था|
वो भी उसकी राह देखती एक कोने मे पेड़ के पास खडी रहती थी |
सबको बोलता था कि जस्ट फ्रेंडशिप है |
दोनो मिलने कि नये बहाने ढून्ड़ने लगते थे |
शाम को छुट्टी के बाद कोलेज लोन मे बेठना जैसा इश्क नही !
वो सोचती थी की वोवैसा नही है|पर,उसे नही पता था की वह वैसा ही है !
******
7) अन्ना का आंदोलन हमारे यहा भी होना चाहिये|
क्यू ? क्या हो गया ?
इससे हमको मिलने का मौका मिलेगा|
यहा सब कुछ डेवेल्पेड़ तो है...
लोगो मे इश्क की तो कमी है |
और वैसे  हम भिड़ के पिछे बिठ के एकांत मे इश्क किया करेंगे !
और वो बोली क्रांति भी हो जायेगी |
******
8) क्लास मे मैडम बोली नयी प्रिन्सपाल मैडम ने सबको प्रोग्रेस कार्ड देने को बोला है,तो आप सब मेरे पास से ले जाना|
दोनो एक दूसरे के सामने देखके मुस्कराने लगे|उनको ही पाता था की प्रोग्रेस सिर्फ दिल मे हुई है|
जब दोनो साथ मे लेने गये और ब्लैंक कार्ड देख के मन ही मन सोचने लगे कि हमारे दिल कि भावनाओ को AA ग्रेड दे देते है!
आखिरकार,लव भी तो जरुरी है इस जीवन मे|
इंजिनियर को दिल भी होता है ,भाई|
******
9) लड़की के हाथ मे इंग्लिश नोवेल देख वो तो चला ही गया सीधे क्लास मे |
और बाद मे गुजराती वाली को ढून्ड़ने लगा |
पहले साल मे तो सिर्फ देसी बोलते देखी थी |और वो तो वैसा ही रेह गया, गाव वाला |
ना पढने वाले लोफर का प्रोब्लेम ही यही होता है|
******
10) वो इंटेलिजेंट होता तो tech-max ना लाता|
     इससे उस्को पता चल गया की मामूली जोब से आगे नही बढनेवाला!
    वो भी बताना चाहता था की अब मेरा कुछ होनेवला नही है इस इंजिनियरिंग मे |
    बोपल के सपने चन्द्खेडा के किराये के मकान मे ही राह देखते रहेंगे |
******
11) और अब ये Ravish Kumar का अपना
       रात को कौन नही सोता ?
      चांद और परेशान....
      सौता कौन होगा ?
     ..आसमान|
     तुम दार्श्निक कब्से हो गयी ?
     जबसे तुम आशिक हो गये...

P.S.:- If there is error in Hindi spellings please  pardon me. And I have copied only one from his book,last one. Vineet Kumar and Girindranath Jah are also writing micro fiction with Ravish Kumar.